You are here: Home » Chapter 35 » Verse 2 » Translation
← Sura 35 →
← Aya 2 →
2
ما يَفتَحِ اللَّهُ لِلنّاسِ مِن رَحمَةٍ فَلا مُمسِكَ لَها ۖ وَما يُمسِك فَلا مُرسِلَ لَهُ مِن بَعدِهِ ۚ وَهُوَ العَزيزُ الحَكيمُ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

लोगों के वास्ते जब (अपनी) रहमत (के दरवाजे) ख़ोल दे तो कोई उसे जारी नहीं कर सकता और जिस चीज़ को रोक ले उसके बाद उसे कोई रोक नहीं सकता और वही हर चीज़ पर ग़ालिब और दाना व बीना हकीम है