You are here: Home » Chapter 31 » Verse 22 » Translation
← Sura 31 →
← Aya 22 →
22
۞ وَمَن يُسلِم وَجهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحسِنٌ فَقَدِ استَمسَكَ بِالعُروَةِ الوُثقىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عاقِبَةُ الأُمورِ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जो कोई आज्ञाकारिता के साथ अपना रुख़ अल्लाह की ओर करे, और वह उत्तमकर भी हो तो उसने मज़बूत सहारा थाम लिया। सारे मामलों की परिणति अल्लाह ही की ओर है