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167
وَلِيَعلَمَ الَّذينَ نافَقوا ۚ وَقيلَ لَهُم تَعالَوا قاتِلوا في سَبيلِ اللَّهِ أَوِ ادفَعوا ۖ قالوا لَو نَعلَمُ قِتالًا لَاتَّبَعناكُم ۗ هُم لِلكُفرِ يَومَئِذٍ أَقرَبُ مِنهُم لِلإيمانِ ۚ يَقولونَ بِأَفواهِهِم ما لَيسَ في قُلوبِهِم ۗ وَاللَّهُ أَعلَمُ بِما يَكتُمونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और मुनाफ़िक़ों को देख ले (कि कौन है) और मुनाफ़िक़ों से कहा गया कि आओ ख़ुदा की राह में जेहाद करो या (ये न सही अपने दुशमन को) हटा दो तो कहने लगे (हाए क्या कहीं) अगर हम लड़ना जानते तो ज़रूर तुम्हारा साथ देते ये लोग उस दिन बनिस्बते ईमान के कुफ़्र के ज्यादा क़रीब थे अपने मुंह से वह बातें कह देते हैं जो उनके दिल में (ख़ाक) नहीं होतीं और जिसे वह छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है