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153
۞ إِذ تُصعِدونَ وَلا تَلوونَ عَلىٰ أَحَدٍ وَالرَّسولُ يَدعوكُم في أُخراكُم فَأَثابَكُم غَمًّا بِغَمٍّ لِكَيلا تَحزَنوا عَلىٰ ما فاتَكُم وَلا ما أَصابَكُم ۗ وَاللَّهُ خَبيرٌ بِما تَعمَلونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जब तुम लोग दूर भागे चले जा रहे थे और किसी को मुड़कर देखते तक न थे और रसूल तुम्हें पुकार रहा था, जबकि वह तुम्हारी दूसरी टुकड़ी के साथ था (जो भागी नहीं), तो अल्लाह ने तुम्हें शोक पर शोक दिया, ताकि तुम्हारे हाथ से कोई चीज़ निकल जाए या तुमपर कोई मुसीबत आए तो तुम शोकाकुल न हो। और जो कुछ भी तुम करते हो, अल्लाह उसकी भली-भाँति ख़बर रखता है