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57
وَقالوا إِن نَتَّبِعِ الهُدىٰ مَعَكَ نُتَخَطَّف مِن أَرضِنا ۚ أَوَلَم نُمَكِّن لَهُم حَرَمًا آمِنًا يُجبىٰ إِلَيهِ ثَمَراتُ كُلِّ شَيءٍ رِزقًا مِن لَدُنّا وَلٰكِنَّ أَكثَرَهُم لا يَعلَمونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

वे कहते है, "यदि हम तुम्हारे साथ इस मार्गदर्शन का अनुसरण करें तो अपने भू-भाग से उचक लिए जाएँगे।" क्या ख़तरों से सुरक्षित हरम में हमने ठिकाना नहीं दिया, जिसकी ओर हमारी ओर से रोज़ी के रूप में हर चीज़ की पैदावार खिंची चली आती है? किन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं