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38
وَقالَ فِرعَونُ يا أَيُّهَا المَلَأُ ما عَلِمتُ لَكُم مِن إِلٰهٍ غَيري فَأَوقِد لي يا هامانُ عَلَى الطّينِ فَاجعَل لي صَرحًا لَعَلّي أَطَّلِعُ إِلىٰ إِلٰهِ موسىٰ وَإِنّي لَأَظُنُّهُ مِنَ الكاذِبينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और (ये सुनकर) फिरऔन ने कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारों मुझ को तो अपने सिवा तुम्हारा कोई परवरदिगार मालूम नही होता (और मूसा दूसरे को ख़ुदा बताता है) तो ऐ हामान (वज़ीर फिरऔन) तुम मेरे वास्ते मिट्टी (की ईटों) का पजावा सुलगाओ फिर मेरे वास्ते एक पुख्ता महल तैयार कराओ ताकि मै (उस पर चढ़ कर) मूसा के ख़ुदा को देंखू और मै तो यक़ीनन मूसा को झूठा समझता हूँ