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87
وَذَا النّونِ إِذ ذَهَبَ مُغاضِبًا فَظَنَّ أَن لَن نَقدِرَ عَلَيهِ فَنادىٰ فِي الظُّلُماتِ أَن لا إِلٰهَ إِلّا أَنتَ سُبحانَكَ إِنّي كُنتُ مِنَ الظّالِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और जुन्नून (यूनुस को याद करो) जबकि गुस्से में आकर चलते हुए और ये ख्याल न किया कि हम उन पर रोज़ी तंग न करेंगे (तो हमने उन्हें मछली के पेट में पहुँचा दिया) तो (घटाटोप) अंधेरे में (घबराकर) चिल्ला उठा कि (परवरदिगार) तेरे सिवा कोई माबूद नहीं तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है बेशक मैं कुसूरवार हूँ