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214
أَم حَسِبتُم أَن تَدخُلُوا الجَنَّةَ وَلَمّا يَأتِكُم مَثَلُ الَّذينَ خَلَوا مِن قَبلِكُم ۖ مَسَّتهُمُ البَأساءُ وَالضَّرّاءُ وَزُلزِلوا حَتّىٰ يَقولَ الرَّسولُ وَالَّذينَ آمَنوا مَعَهُ مَتىٰ نَصرُ اللَّهِ ۗ أَلا إِنَّ نَصرَ اللَّهِ قَريبٌ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

क्या तुम ये ख्याल करते हो कि बेहश्त में पहुँच ही जाओगे हालॉकि अभी तक तुम्हे अगले ज़माने वालों की सी हालत नहीं पेश आयी कि उन्हें तरह तरह की तक़लीफों (फाक़ा कशी मोहताजी) और बीमारी ने घेर लिया था और ज़लज़ले में इस क़दर झिंझोडे ग़ए कि आख़िर (आज़िज़ हो के) पैग़म्बर और ईमान वाले जो उन के साथ थे कहने लगे देखिए ख़ुदा की मदद कब (होती) है देखो (घबराओ नहीं) ख़ुदा की मदद यक़ीनन बहुत क़रीब है