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165
وَمِنَ النّاسِ مَن يَتَّخِذُ مِن دونِ اللَّهِ أَندادًا يُحِبّونَهُم كَحُبِّ اللَّهِ ۖ وَالَّذينَ آمَنوا أَشَدُّ حُبًّا لِلَّهِ ۗ وَلَو يَرَى الَّذينَ ظَلَموا إِذ يَرَونَ العَذابَ أَنَّ القُوَّةَ لِلَّهِ جَميعًا وَأَنَّ اللَّهَ شَديدُ العَذابِ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़ुदा के सिवा औरों को भी ख़ुदा का मिसल व शरीक बनाते हैं (और) जैसी मोहब्बत ख़ुदा से रखनी चाहिए वैसी ही उन से रखते हैं और जो लोग ईमानदार हैं वह उन से कहीं बढ़ कर ख़ुदा की उलफ़त रखते हैं और काश ज़ालिमों को (इस वक्त) वह बात सूझती जो अज़ाब देखने के बाद सूझेगी कि यक़ीनन हर तरह की क़ूवत ख़ुदा ही को है और ये कि बेशक ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब वाला है