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150
وَمِن حَيثُ خَرَجتَ فَوَلِّ وَجهَكَ شَطرَ المَسجِدِ الحَرامِ ۚ وَحَيثُ ما كُنتُم فَوَلّوا وُجوهَكُم شَطرَهُ لِئَلّا يَكونَ لِلنّاسِ عَلَيكُم حُجَّةٌ إِلَّا الَّذينَ ظَلَموا مِنهُم فَلا تَخشَوهُم وَاخشَوني وَلِأُتِمَّ نِعمَتي عَلَيكُم وَلَعَلَّكُم تَهتَدونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जहाँ से भी तुम निकलो, 'मस्जिदे हराम' की ओर अपना मुँह फेर लिया करो, और जहाँ कहीं भी तुम हो उसी की ओर मुँह कर लिया करो, ताकि लोगों के पास तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई हुज्जत बाक़ी न रहे - सिवाय उन लोगों के जो उनमें ज़ालिम हैं, तुम उनसे न डरो, मुझसे ही डरो - और ताकि मैं तुमपर अपनी नेमत पूरी कर दूँ, और ताकि तुम सीधी राह चलो