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113
وَقالَتِ اليَهودُ لَيسَتِ النَّصارىٰ عَلىٰ شَيءٍ وَقالَتِ النَّصارىٰ لَيسَتِ اليَهودُ عَلىٰ شَيءٍ وَهُم يَتلونَ الكِتابَ ۗ كَذٰلِكَ قالَ الَّذينَ لا يَعلَمونَ مِثلَ قَولِهِم ۚ فَاللَّهُ يَحكُمُ بَينَهُم يَومَ القِيامَةِ فيما كانوا فيهِ يَختَلِفونَ

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

और यहूद कहते हैं कि नसारा का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं और नसारा कहते हैं कि यहूद का मज़हब कुछ (ठीक) नहीं हालाँकि ये दोनों फरीक़ किताबे (खुदा) पढ़ते रहते हैं इसी तरह उन्हीं जैसी बातें वह (मुशरेकीन अरब) भी किया करते हैं जो (खुदा के एहकाम) कुछ नहीं जानते तो जिस बात में ये लोग पड़े झगड़ते हैं (दुनिया में तो तय न होगा) क़यामत के दिन खुदा उनके दरमियान ठीक फैसला कर देगा