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42
وَأُحيطَ بِثَمَرِهِ فَأَصبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيهِ عَلىٰ ما أَنفَقَ فيها وَهِيَ خاوِيَةٌ عَلىٰ عُروشِها وَيَقولُ يا لَيتَني لَم أُشرِك بِرَبّي أَحَدًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

(चुनान्चे अज़ाब नाज़िल हुआ) और उसके (बाग़ के) फल (आफत में) घेर लिए गए तो उस माल पर जो बाग़ की तैयारी में सर्फ (ख़र्च) किया था (अफसोस से) हाथ मलने लगा और बाग़ की ये हालत थी कि अपनी टहनियों पर औंधा गिरा हुआ पड़ा था तो कहने लगा काश मै अपने परवरदिगार का किसी को शरीक न बनाता