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15
مَنِ اهتَدىٰ فَإِنَّما يَهتَدي لِنَفسِهِ ۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّما يَضِلُّ عَلَيها ۚ وَلا تَزِرُ وازِرَةٌ وِزرَ أُخرىٰ ۗ وَما كُنّا مُعَذِّبينَ حَتّىٰ نَبعَثَ رَسولًا

फ़ारूक़ ख़ान & नदवी

जो शख़्श रुबरु होता है तो बस अपने फायदे के लिए यह पर आता है और जो शख़्श गुमराह होता है तो उसने भटक कर अपना आप बिगाड़ा और कोई शख़्श किसी दूसरे (के गुनाह) का बोझ अपने सर नहीं लेगा और हम तो जब तक रसूल को भेजकर तमाम हुज्जत न कर लें किसी पर अज़ाब नहीं किया करते