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14
لَهُ دَعوَةُ الحَقِّ ۖ وَالَّذينَ يَدعونَ مِن دونِهِ لا يَستَجيبونَ لَهُم بِشَيءٍ إِلّا كَباسِطِ كَفَّيهِ إِلَى الماءِ لِيَبلُغَ فاهُ وَما هُوَ بِبالِغِهِ ۚ وَما دُعاءُ الكافِرينَ إِلّا في ضَلالٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसी के लिए सच्ची पुकार है। उससे हटकर जिनको वे पुकारते है, वे उनकी पुकार का कुछ भी उत्तर नहीं देते। बस यह ऐसा ही होता है जैसे कोई अपने दोनों हाथ पानी की ओर इसलिए फैलाए कि वह उसके मुँह में पहुँच जाए, हालाँकि वह उसतक पहुँचनेवाला नहीं। कुफ़्र करनेवालों की पुकार तो बस भटकने ही के लिए होती है