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11
لَهُ مُعَقِّباتٌ مِن بَينِ يَدَيهِ وَمِن خَلفِهِ يَحفَظونَهُ مِن أَمرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لا يُغَيِّرُ ما بِقَومٍ حَتّىٰ يُغَيِّروا ما بِأَنفُسِهِم ۗ وَإِذا أَرادَ اللَّهُ بِقَومٍ سوءًا فَلا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَما لَهُم مِن دونِهِ مِن والٍ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

उसके रक्षक (पहरेदार) उसके अपने आगे और पीछे लगे होते हैं जो अल्लाह के आदेश से उसकी रक्षा करते है। किसी क़ौम के लोगों को जो कुछ प्राप्त होता है अल्लाह उसे बदलता नहीं, जब तक कि वे स्वयं अपने आपको न बदल डालें। और जब अल्लाह किसी क़ौम का अनिष्ट चाहता है तो फिर वह उससे टल नहीं सकता, और उससे हटकर उनका कोई समर्थक और संरक्षक भी नहीं