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80
فَلَمَّا استَيأَسوا مِنهُ خَلَصوا نَجِيًّا ۖ قالَ كَبيرُهُم أَلَم تَعلَموا أَنَّ أَباكُم قَد أَخَذَ عَلَيكُم مَوثِقًا مِنَ اللَّهِ وَمِن قَبلُ ما فَرَّطتُم في يوسُفَ ۖ فَلَن أَبرَحَ الأَرضَ حَتّىٰ يَأذَنَ لي أَبي أَو يَحكُمَ اللَّهُ لي ۖ وَهُوَ خَيرُ الحاكِمينَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

तो जब से वे उससे निराश हो गए तो परामर्श करने के लिए अलग जा बैठे। उनमें जो बड़ा था, वह कहने लगा, "क्या तुम जानते नहीं कि तुम्हारा बाप अल्लाह के नाम पर तुमसे वचन ले चुका है और उसको जो इससे पहले यूसुफ़ के मामले में तुमसे क़सूर हो चुका है? मैं तो इस भू-भाग से कदापि टलने का नहीं जब तक कि मेरे बाप मुझे अनुमति न दें या अल्लाह ही मेरे हक़ में कोई फ़ैसला कर दे। और वही सबसे अच्छा फ़ैसला करनेवाला है