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21
وَإِذا أَذَقنَا النّاسَ رَحمَةً مِن بَعدِ ضَرّاءَ مَسَّتهُم إِذا لَهُم مَكرٌ في آياتِنا ۚ قُلِ اللَّهُ أَسرَعُ مَكرًا ۚ إِنَّ رُسُلَنا يَكتُبونَ ما تَمكُرونَ

फ़ारूक़ ख़ान & अहमद

जब हम लोगों को उनके किसी तकलीफ़ में पड़ने के पश्चात दयालुता का रसास्वादन कराते है तो वे हमारी आयतों के विषय में चालबाज़ियाँ करने लग जाते है। कह दो, "अल्लाह की चाल ज़्यादा तेज़ है।" निस्संदेह, जो चालबाजियाँ तुम कर रहे हो, हमारे भेजे हुए (फ़रिश्ते) उनको लिखते जा रहे है